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सायनॉसिस क्या है कारण और उपचार | Cyanosis Kya hai

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इस आर्टिकल में हम सायनॉसिस क्या है उसके कारण और उपचार क्या हैं | Cyanosis Kya hai के बारे में जानेंगे और जानेगे की किस तरह से हम सायनॉसिस को ठीक कर सकते है।

Cyanosis Kya hai

Cyanosis Kya hai

हमारे शरीर पर कई बार नीले रंग के धब्बे आते हैं और कुछ समय बाद अपने आप ही ठीक हो जाता है.

यह चोट लगने से आते हैं लेकिन यह भी हो सकता है कि आप सायनॉसिस के शिकार हों.

शरीर में ऑक्‍सीजन की कमी वाले खून का रंग नीला हो जाता है और जब यह त्‍वचा में प्रवेश करता है तो यह फेफड़े, ह़दय और संचार प्रणाली से जुड़ी कोई बीमारियों का कारण बन जाता है.

सायनॉसिस में इन धब्‍बों के अलावा ऑक्‍सीजन की कमी की वजह से बेहोशी आना, लंबे समय तक होश न रहना आदि भी हो सकता है.

और यदि इसका इलाज समय र ना किया जाए तो इसकी वजह से  दौरा पड़ना, ब्रेन स्‍टैम रिफ्लैक्‍स, ब्रेन डैड होने तक की नौबत आ सकती है. सायनॉसिस को शरीर में किसी समस्‍या का संकेत कहा जा सकता है.

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सायनॉसिस के चार प्रकार हैं

  • एक्रोसायनॉसिस  तब होता है जब शरीर अत्‍यधिक ठंडा हो जाता है और आपके हाथों और पैरों के आसपास नीले निशान पड़ने लगते हैं.  ऐसे में तत्‍काल शरीर को गरमाहट की जरूरत होती है.
  • पेरीफेरल सायनॉसिस जिसमें आपके हाथ पैरों को पर्याप्‍त मात्रा में ऑक्‍सीजन नहीं मिल रही और कम प्रवाह या किसी चोट की वजह से ये हो सकता है.
  • सेंट्रल सायनॉसिस जिसमें आपके शरीर को कम ऑक्‍सीजन मिल रही है जो कि असामान्‍य ब्‍लड प्रोटीन या लो ऑक्‍सीजन स्‍टेट की वजह से होता है.
  • मिक्‍स्‍ड सायनॉसिस में पेरीफेरल और सैंट्रल सायनॉसिस का मिला जुला रूप होता है और ये दोनों एक साथ होते हैं.

 

ऐसे लक्षण दिखे तो लापरवाही न करें

  • निमोनिया हुआ हो.
  • गंभीर एनीमिया या रेड ब्‍लड सेल में कमी हुई हो.
  • कुछ खास किस्‍म की दवाओं की अधिक सेवन हुआ हो.
  • सायनायड जैसे विष के संपर्क में आया हो.
  • अगर आप लंबे समय से श्‍वसन रोग, जैसे कि अस्‍थमा या सीओपीडी के मरीज हों.
  • रेनॉड्स सिंड्रोम यानी आपकी उंगलियों या पंजों को रक्‍तप्रवाह संकुचित हो गई  हो.
  • हाइपोथर्मिया या अत्‍यधिक ठंड के कारण शरीर का तापमान कम होता जा रहा हो.

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उपरोक्त लक्षण दिखे तो क्‍या करें

तुरंत डॉक्‍टर के संपर्क में जाएं. वे जांच के आधार पर सायनॉसिस का इलाज करेंगे.  इसके लिए हो सकता है वे  इमेजिंग स्‍कैन, जैसे कि एक्‍सरे, सीटी स्‍कैन, ईसीजी आदि से आपके हृदय या फेफड़े आदि की की जांच करेंगे.

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