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शुक्राणुओं को प्रभावित करता है कोरोना | Corona ka dushprabhav

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इस आर्टिकल में कोरोना के दुष्प्रभाव | Corona ka dushprabhav In Hindi के बारे में जानेंगे और जानेगे की किस तरह से हम कोरोना से बच सकते है।

Corona ka dushprabhav

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एक हेल्थ रिसर्च में दावा किया गया है कि कोरोना ना सिर्फ फेफड़ों को प्रभावित करता है बल्कि शुक्राणुओं की संख्या में भी कमी लाता है।

कोरोना फेफड़ों को प्रभावित करता है लेकिन हाल ही में विशेषज्ञ ने कहा है कि यह महामारी अस्थायी रूप से शुक्राणुजनन की प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है। स्पेश्लिष्ट ने कहा, ‘कोरोना के ठीक होने के बाद शुक्राणुओं की सामान्य संख्या को लौटने में दो-तीन महीने लगते हैं।’

पूर्व के अध्ययनों से पता चला है कि वायरल रोग जैसे हेपेटाइटिस सी, ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी), हर्पीज और इबोला जैसी बीमारियां शुक्राणुजनन, शुक्राणुओं की संख्या, हार्मोन का स्तर और शुक्राणु की गतिशीलता को प्रभावित करती हैं।

स्पेश्लिष्ट ने कहा कि यही पैटर्न Sars-Cov-2 से संक्रमित पुरुष रोगियों में भी देखा जा रहा है, जो कोरोना वायरस के कारण बनता है।

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शुक्राणुओं को प्रभावित करता है कोरोना

विशेषज्ञ डॉ बग्गा ने कहा, ‘कोरोना के कारण बुखार होता है, जो एक रोगी में शुक्राणुजनन को प्रभावित करता है।  संक्रमण के बाद ठीक हुए मरीजों में शुक्राणुओं की संख्या कम हो जाती है, लेकिन यह अस्थायी है।’

डॉक्टर का कहना है कि कोविड -19 प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है, लेकिन यह सिर्फ अस्थायी है।

“हमने देखा है कि पुरुष कोरोना संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, जो अल्पकालिक शुक्राणु की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। लेकिन दो-तीन महीने में वे पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। मैंने किसी भी मरीज में कोई स्थायी क्षति नहीं देखी है।”

नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन रिप्रोडक्टिव हेल्थ के एक शोधकर्ता ने कहा, ‘कुछ शोधकर्ताओं ने दिखाया है कि प्रजनन अंगों में एंजियोटेंसिन-परिवर्तित एंजाइम 2 रिसेप्टर्स होते हैं जो Sars-Cov-2 के लिए एक प्रवेश बिंदु प्रदान करते हैं।

विश्व के शोधकर्ताओं ने संक्रमित पुरुषों में प्रजनन अंगों में वायरस पाया है। इसलिए, इस बात की संभावना है कि वायरस शुक्राणुओं की संख्या कम कर सकता है, लेकिन इस पर और रिसर्च की आवश्यकता है।’

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स्पेश्लिष्ट ने सुझाव दिया है कि कोरोना से ठीक हुए मरीज अगर संक्रमण से उबरने के बाद अपने यौन व्यवहार में या गर्भावस्था की योजना बनाते समय किसी भी तरह के बदलाव का सामना करते हैं तो डॉक्टर से अवश्य सलाह लें।

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